कान्हा के बंशी की धुन संग दही-हांड़ी का धमाल (जन्माष्टमी पर्व)

गोविंदा आला रे

ऐसी मान्यता है कि श्री कृष्ण भगवान को माखन और दही से अत्यधिक प्रेम था। बाल्यावस्था में वह अपने मित्रों के साथ हांडियों में से दही और माखन चुरा कर खाते थे। उनकी इसी बाल-सुलभ चंचलता को याद करते हुए जन्माष्टमी पर दही-हांड़ी प्रतियोगिता को आयोजित करने की परंपरा चल निकली। इस खेल में लड़को का एक समूह ऊचांईं पर […]

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जन्माष्टमी (कान्हा का जन्मोत्सव)

कान्हा

कृष्ण जन्माष्टमी अर्थात् अष्टमी के दिन श्री कृष्ण का जन्म दिवस जन्माष्टमी का त्यौहार हिंदी पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। जन्माष्टमी के सम्बन्ध में कथा प्रचलित है कि द्वापर युग में इसी तिथि को भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था और इसीलिए भगवान  के जन्मोत्सव को जन्माष्टमी के त्यौहार के […]

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सम्पूर्ण सिंह कालरा उर्फ़ गुलज़ार (जन्मदिन)

गुलज़ार

  हिन्दी फिल्मों के प्रसिद्ध गीतकार गुलज़ार उर्फ़ सम्पूर्ण सिंह कालरा का आज 18 अगस्त को जन्मदिन है। गुलज़ार गीतकार होने के साथ ही एक कवि, पटकथा लेखक, फ़िल्म निर्देशक तथा नाटककार भी हैं। ये मुख्यतः हिंदी, उर्दू और पंजाबी में ही लिखते हैं लेकिन ब्रजभाषा, खड़ी बोली, मारवाड़ी और हरियाणवी में भी इन्होने कुछ रचनाएँ लिखीं हैं। गुलज़ार साहब […]

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श्रावणी (सावन) पूर्णिमा (रक्षाबंधन पर्व)

रक्षाबंधन

श्रावण (सावन) मास (महीना) के अंतिम दिन पूर्णिमा की तिथि को रक्षाबंधन पर्व मनाया जाता है। यह पर्व भाई-बहन के मधुर प्रेम का प्रतीक है। रक्षाबंधन के पवित्र दिन बहनें अपने भाई की सलामती और कामयाबी कामना करती हैं और उन्हें रक्षा-सूत्र (राखी) बाधतीं हैं,साथ ही भाई भी तन-मन-धन से बहन के हितरक्षा का वचन लेते हैं और बहनों को उपहार […]

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सावन की अगन (श्रृंगार रस के वियोग भाव के गीत)

lagi aaj sawan ki fir vo jhadi hai

सावन की श्रृंखलाबद्ध कड़ियों के सन्दर्भ में प्रथम कड़ी झूमता सावन में श्रृंगार रस के संयोग भावों का वर्णन किया गया है। इसी तर्ज पर इस कड़ी में श्रृंगार रस के वियोग रूप की व्याख्या है। वियोग भाव अर्थात् प्रेमी-युगल के बिछड़ने की अवस्था दो प्रेमी ह्रदयों को विरह की इस बेला में सावन की बूंदें भी ठंडक का एहसास […]

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