याद करो कुर्बानी (स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या)

सन् 1947 में सैकड़ों वर्षों से गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ हमारा भारत देश आजाद हुआ था। यह आजादी उन लाखों लोगों के त्याग और बलिदान स्वरूप हमें मिला है, जिन्होंने देश के लिए अपना तन-मन-धन सब हँसते- हँसते न्यौछावर कर दिया। देश के उन महान सपूतों की आहुति की बदौलत ही आज हम स्वतन्त्र भारत में साँस ले […]

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सावन की अगन (श्रृंगार रस के वियोग भाव के गीत)

सावन की श्रृंखलाबद्ध कड़ियों के सन्दर्भ में प्रथम कड़ी झूमता सावन में श्रृंगार रस के संयोग भावों का वर्णन किया गया है। इसी तर्ज पर इस कड़ी में श्रृंगार रस के वियोग रूप की व्याख्या है। वियोग भाव अर्थात् प्रेमी-युगल के बिछड़ने की अवस्था दो प्रेमी ह्रदयों को विरह की इस बेला में सावन की बूंदें भी ठंडक का एहसास […]

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झूमता सावन (श्रृंगार रस के संयोग भाव के गीत)

सावन के महीने में भक्ति और श्रृंगार रस का मिश्रित समावेश होता है। सावन में जहाँ एक ओर शिव भक्तगण भक्ति के रस से सराबोर रहते हैं, वहीं वर्षा ऋतु के  चरम उत्कर्ष वाला सावन का यह सुहाना मौसम श्रृंगार रस के प्रेम में भी डूबा रहता है। अनगिनत फूलों की खुशबू , रंग-बिरंगी उड़ती तितलियाँ, भौरों की गुंजन और मंद […]

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Monsoon Special

रिमझिम बारिश के सुहावने मौसम का एक अलग ही मजा होता है ।काले घने बादलों की गड़गड़ाहट दिल की धड़कन तेज कर देती है ।बारिश की बूंदों की छन-छन सुन ऐसा लगता है , जैसे बारिश ने नई दुल्हन की तरह ढेरों घुन्घुरुओं वाले पाजेब पहन लिए हों और प्रकृति ने दुल्हन के घूँघट की तरह हरियाली की ओढ़नी ओढ़ ली […]

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लोकप्रिय गीतकार और जनकवि शैलेन्द्र (जन्मदिन)

  लोकप्रिय गीतकार और जनकवि शैलेन्द्र का आज 30 अगस्त को जन्मदिन है। “तू जिन्दा है तो  जिंदगी की जीत पर यकीन कर, अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला जमीन पर’  जनकवि शैलेन्द्र का उत्साह, उमंग और आशान्वित जीवन से भरपूर यह गीत आज भी स्वतः ही जन-जन के अन्दर हौसले का जज्बा उजागर कर देता है। सन् 1948 […]

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