सावन की अगन (श्रृंगार रस के वियोग भाव के गीत)

सावन की श्रृंखलाबद्ध कड़ियों के सन्दर्भ में प्रथम कड़ी झूमता सावन में श्रृंगार रस के संयोग भावों का वर्णन किया गया है। इसी तर्ज पर इस कड़ी में श्रृंगार रस के वियोग रूप की व्याlagi aaj sawan ki fir vo jhadi haiख्या है। वियोग भाव अर्थात् प्रेमी-युगल के बिछड़ने की अवस्था दो प्रेमी ह्रदयों को विरह की इस बेला में सावन की बूंदें भी ठंडक का एहसास नहीं कराती हैं, बल्कि बूंदों की टिप-टिप उन्हें तड़पाती है ।  आइये सुनते है, पंचम कड़ी सावन की अगन (श्रृंगार रस के वियोग भाव के गीत) में तड़पते दिल से निकले बोल: 

 

https://www.youtube.com/watch?v=fCu1egAT760

सावन के गीत-श्रृंखलाबद्ध कड़ियों में-प्रथम कड़ी-झूमता सावन (श्रृंगार रस के संयोग भाव के गीत):

झूमता सावन (श्रृंगार रस के संयोग भाव के गीत)

सावन के गीत-श्रृंखलाबद्ध कड़ियों में-षष्ठं और अंतिम कड़ी- [श्रावणी (सावन) पूर्णिमा (रक्षाबंधन पर्व)]:

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